भारत चाहता है साथी, नहीं सलाहकार: जयशंकर का यूरोप को संदेश

भारत यूरोप को संदेश दे रहा है: साथी बनो, नहीं सलाहकार!
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूरोप को चुनौती दी है, कहा है कि हमें साथी चाहिए, नहीं सलाहकार। उन्होंने कहा कि भारत ‘रूस रियलिज्म’ का समर्थक है और रूस और भारत के बीच संसाधनों के आपूर्तिकर्ता और उपभोक्ता के रूप में बहुत अच्छी तालमेल है।
जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान रूस को शामिल किए बिना पश्चिम द्वारा खोजने का प्रयास, ‘रियलिज्म’ की मूल बातों को चुनौती देता है। उन्होंने कहा, ‘मैं रूस रियलिज्म का समर्थक हूँ, मैं अमेरिका रियलिज्म का भी समर्थक हूँ।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ जुड़ने का सबसे अच्छा तरीका, वैचारिक मतभेदों को सामने नहीं लाकर, बल्कि, सामान्य हितों को खोजकर है।
जयशंकर ने कहा कि, ‘जब हम दुनिया को देखते हैं, तो हम साथी ढूंढते हैं, हम सलाहकार नहीं ढूंढते हैं, विशेष रूप से वे सलाहकार जो घर पर अभ्यास नहीं करते हैं और बाहर प्रचार करते हैं।’
उन्होंने कहा कि यूरोप को प्रचार करने और काम करने के लिए एक म्यूचुअल फ्रेमवर्क पर आधारित होना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों ने इस दिशा में प्रगति की है, लेकिन सभी को अभी भी यह समझने की ज़रूरत है कि दुनिया कैसे काम करती है।



