जातिगणना : ‘पसमांडा’ मुसलमानों को OBC में गिना जा सकता है?

‘पसमांडा’ मुसलमानों के लिए एक नया अध्याय?
भारत में आगामी जनगणना में, ‘पसमांडा’ मुसलमानों को अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यह एक बड़ा बदलाव है जो भारत के इतिहास में पहली बार ‘पसमांडा’ समुदाय को उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अनुसार पहचानने की कोशिश कर रहा है।
बीजेपी नेता इस फैसले का समर्थन करते हुए कहते हैं कि ‘पसमांडा’ मुसलमान भी भारत के नागरिक हैं और उन्हें उनके पिछड़ेपन के आधार पर जनगणना में जगह मिलनी चाहिए।
‘पसमांडा’ कौन हैं?
‘पसमांडा’ एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पीछे छूटे हुए’। इसे भारत में मुस्लिम समुदाय के उन समूहों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
सच्चर समिति के अनुसार, भारत में OBC और SC/ST मुसलमानों की संख्या 40% है। लेकिन ‘पसमांडा’ कार्यकर्ता और विद्वानों का मानना है कि ये 80-85% तक होते हैं। यह संख्या 1871 की जनगणना से भी मेल खाती है, जिसमें भारत में मुस्लिमों के 19% ही उच्च जाति के थे, जबकि 81% निचली जातियों से आते थे।
जनगणना और राजनीति
बीजेपी, जिसे अक्सर अल्पसंख्यक विरोधी होने के रूप में देखा जाता है, ‘पसमांडा’ मुसलमानों को लुभाने की कोशिश कर रही है। जनगणना में उन्हें OBC के रूप में गिनाने से उन्हें आरक्षण के लाभ मिलेंगे।
कई राजनीतिक पक्षों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे ‘मुस्लिम समुदाय के अंदर विभाजन’ को बढ़ावा देने का प्रयास बताया है।
चुनौतियाँ
कुछ लोगों का मानना है कि केवल ‘पसमांडा’ मुसलमानों को अलग-अलग श्रेणी में गिनना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।



