जातिनिहाय जनगणना : एक बुरी सोच जिसका समय आया?

जातिनिहाय जनगणना : एक बुरी सोच जिसका समय आया?
क्या जातिनिहाय जनगणना सिर्फ़ एक बुरी सोच है? कुछ लोग इसे ‘एक बुरी सोच जिसका समय आ गया’ कहते हैं। आइये समझते हैं कि क्यों।
सरकार ने आखिरकार 2021 की जनगणना करने का फैसला किया है, जो 5 साल से टाल दी जा रही थी। जनगणना के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि यह इतने समय तक टाल दी गई है! यह 1881 से लेकर अब तक हर दशक में होती रही है, लेकिन इस बार अचानक यह फैसला लिया गया है।
यह जातिनिहाय जनगणना एक मुश्किल मुद्दा है। बहुत से लोग इसे स्वागत करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को डर है कि इससे क्या नुकसान हो सकता है।
जातिनिहाय जनगणना की चिंताएं
मुख्य चिंता यह है कि क्या सरकार इस डेटा का इस्तेमाल सही तरीके से करेगी? पहले भी कई बार डेटा इकट्ठा किया गया था, लेकिन उसका कोई इस्तेमाल नहीं किया गया। भाजपा ने खुद इस मुद्दे पर बहुत कुछ कहा है, लेकिन अब यह डेटा एक रहस्य बना हुआ है।
ये डेटा जटिल है और इसका इस्तेमाल सावधानी से करना होगा। अगर इसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जाए, तो इससे सामाजिक अशांति हो सकती है।
राहुल गांधी का कदम
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जातिनिहाय जनगणना के बारे में राहुल गांधी की क्या राय है। उन्होंने इस मुद्दे पर काफी कुछ कहा है और उनका कहना है कि इससे ओबीसी के अधिकारों को मजबूत किया जा सकता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार जातिनिहाय जनगणना के डेटा का कैसे इस्तेमाल करेगी। क्या यह देश के लिए फायदेमंद होगा या नुकसान?



